प्रेम करो तो चौंकते हैं इस दुनिया के लोग
कतरा के निकलो तो रोकते हैं इस दुनिया के लोग
मैं कितनी उम्मीद से आया था इस शहर में
हर कदम पे नाउम्मीद करते जाते हैं, इस दुनिया के लोग
मेरी पेशानी पे हैं अब भी चिंता की लकीरें
गले में फूलों को हार पहनाते हैं, इस दुनिया के लोग
मैं अपनी ही दुनिया में गुम रहना चाहता हूँ
मुझे खींच के इस दुनिया में ले आते हैं, इस दुनिया के लोग
हँस लो मेरे हालात-ए-जुनूँ पे तुम भले आज
कल मेरी बहकी बातों को फ़लसफ़ा बताएँगे इस दुनिया के लोग
मैं अपनी धुन का पक्का हूँ जिस तरह
मेरी कब्र भी वैसी पक्की बनवाएँगें, इस दुनिया के लोग






















