Sunday, November 1, 2009

कोई आखिरी नेपथ्य नहीं होता




प्रकाश-वृत्त में और पर्दे
के आगे खड़ा नहीं
रहना होता हमेशा...
अपनी भूमिका निभाने के बाद
छोड़ना ही होता है
मंच
जाना ही होता है
नेपथ्य में, पर्दे के पीछे
अभिनेता बड़ा हो या छोटा
.............
मगर जिन्दगी नाटक नहीं
यहाँ कोई नेपथ्य नहीं होता
पर्दे के पीछे पर्दे
नेपथ्य के पीछे नेपथ्य
-यही क्रम आगे भी-
बदलते हैं केवल रोल
और यह तो हर कोई है जानता
-बहुरूपियों के लिए
नेपथ्य का कोई
अर्थ नहीं होता-






1 comment:

  1. जिंदगी लाइव प्रोग्राम है...कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई सेट नहीं, कोई मेकअप नहीं....तभी तो हकीकत में दुख दर्द होते हैं... कोई अभिनय नहीं होता...।

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।