Wednesday, April 20, 2011

केसरिया है प्रेम म्हारो

एक फूल में
उगते हैं
दो फूल केसर
एक कहलाता है केसर
खुशबू, स्वाद, सौंदर्यवर्धक
दूसरा
कहलाता है घास
भाई लोग इसे
केसरिया रंग और खुशबू में
रंग, बना देते हैं केसर
असली-सा
कसौटी पर गर न चढ़े
तो कोई जान नहीं पाता असलियत
बिकता है ज्यादा नकली, असली से
मगर जब होती है पहचान
तब असल पाता है
अपनी जगह और मान
...............
प्यार जो मैंने किया है तुम्हें
काश! कभी कसौटी पर चढ़े
तब हो पहचान

Tuesday, April 19, 2011

सोनमर्ग

आए ढेरों मिसरे
लिख न पाया
एक भी
नज़म
एक भी गज़ल
बस उठा लिए कुछ बीज
जिन्हें
बनाने की कोशिश करूँगा
चिनार, सफेदा, देवदार, चीड़
या जो भी कुछ...

Monday, April 18, 2011

रोमांस

पत्ते चिनार के
रखती है सफ़ों के बीच
एक लड़की
गोकि याद रहे
चिनार बाग और कश्मीर
उन सफ़ों को खोलने का
वक्त भले ना हो
उसके पास



Sunday, April 17, 2011

पहलगाम

कल-कल लिद्दर
ठंडी छाँह
दसियों रंग
ढेरों फूल
महँगी रोटी, सस्ती धाम
जितने घोड़े, उतनी गाड़ी
अब तो नहीं
पहले होगा गाम
पहलगाम


मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।