Saturday, December 5, 2009

मडगाँव




शांत,सुखद
मन को अच्छा लगने-सा
गोवा का एक कस्बा-सा
......मडगाँव.......
नारियल,कटहल के पेड़
होटल के दालान में
छाई ,लटकती
किसी बेल-सा
सुरम्य ठाँव
' यहीं रुको एक और दिन '
कहती है एक खूबसूरत गोवन-सी लड़की
...................................कहाँ जाँव ?

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।