Monday, November 16, 2009

ग़ज़ल से बेवफ़ाई

आँसुओं के स्वाद से बता सकता हूँ
कितनी है तेरे दुख की गहराई
हिचकी के जोर को पहचान कर
जानता हूँ कितनी मेरी याद आई
बड़ी जोर से गरजे, बरसे नहीं बादल
जाने क्या सोचकर मेरी आँख भर आई
एक बच्चा अपनी माँ की ऊँगली थामे जा रहा था
अपने बचपन की शिद्दत से मुझे याद आई
कल रात मेरी गज़लों ने आके मुझसे कहा
कहाँ हो यार मुँह छुपाए, ऐसी भी क्या बेवफाई



2 comments:

  1. गज़लों से भी वफा निभाएँ कभी....

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  2. भैया, आन्सुओं का स्वाद तो जिसके बहते हैं वही जानता है, आप दूर से कैसे स्वाद जानोगे? अन्तर्यामी हो या जादूगर?

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।