Friday, December 11, 2009

निशाचर समुद्र




सोया भी जा सकता है
समुद्र किनारे
लहरों की लोरियां
सुनते-सुनते.....

मगर क्या यह
समुद्र का मान-भंग
करना न होगा

कोई कैसे
सो सकता है
जब सागर
जाग-आलाप रहा हो


शायद समुद्र
रात को
ज्यादा जागता है....!

1 comment:

  1. समुद्र को देखा ही नहीं सुना-गुना और जिया है आपने....

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।