Thursday, December 17, 2009

इस दुनिया के लोग




प्रेम करो तो चौंकते हैं इस दुनिया के लोग
कतरा के निकलो तो रोकते हैं इस दुनिया के लोग


मैं कितनी उम्मीद से आया था इस शहर में
हर कदम पे नाउम्मीद करते जाते हैं, इस दुनिया के लोग

मेरी पेशानी पे हैं अब भी चिंता की लकीरें
गले में फूलों को हार पहनाते हैं, इस दुनिया के लोग

मैं अपनी ही दुनिया में गुम रहना चाहता हूँ
मुझे खींच के इस दुनिया में ले आते हैं, इस दुनिया के लोग


हँस लो मेरे हालात-ए-जुनूँ पे तुम भले आज
कल मेरी बहकी बातों को फ़लसफ़ा बताएँगे इस दुनिया के लोग

मैं अपनी धुन का पक्का हूँ जिस तरह
मेरी कब्र भी वैसी पक्की बनवाएँगें, इस दुनिया के लोग

1 comment:

  1. परखना मत परखने पे कोई अपना नहीं रहता....दुनिया को मत देखो बस अपना काम करते जाओ

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।