Thursday, October 22, 2009

खामोशी


 बहुत कोशिशों के बाद , सिर्फ इतना बोली खामोशी मैं भी बहुत मुखर थी कभी अब सिल लिए हैं होंठ होंठ क्योंकि जब भी खुलते हैं दूरियाँ बढाते हैं.........

1 comment:

  1. ख़ामोशी भी कभी चाहती है कि आईडेंटिफाई हो आपकी कविताओं में....

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।