Monday, October 19, 2015

बंद मुट्ठी अंजुरी हो जाना चाहती है

ढीली कर दी जाती है 
एक दिन
अनायास ही
सम्पूर्ण ताकत से 
बंद की गई मुट्ठी
इसलिए नहीं कि
चुक गई है शक्ति
याकि क्षीण हो गई है शिराएँ
बल्कि
इसलिए कि
एक दुर्निवार आतंरिक पुकार
के आगे झुकना पड़ता है सभी को
..........
हर बंद मुट्ठी
अंजुरी हो जाना चाहती है
एक दिन

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।