Monday, October 19, 2015

समय


कभी सघन कभी विरल
कभी सुनहरा कभी बदरंग
कभी स्याह कभी सतरंग
मैं रंग की नहीं 
समय की बात कर रहा हूँ
कभी सापेक्ष कभी निरपेक्ष
कभी घोर अँधेरे सा
कभी रोशन किरण सा
कभी रेशमी मुलायम
कभी सख्त फौलाद सा
अज़ीब गोरखधंधा है समय
कभी स्वर्ण मृग बन जाता है
कभी अमृत कलश बिंधवाता है
कभी लड़ता है युद्ध
कभी पलायन
कभी जल समाधि दिलवाता है
कभी बँट जाता है युगों में
कभी सतत् चलता जाता है
कभी हारता है खुद से
कभी सबको हराता जाता है
अजीब !अदभुत ! अपरिवर्तनीय !
समय !समय !! समय !!!

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।