Monday, October 19, 2015

दूसरी ज़बान को भी समझो - सराहो

विचार 
किसी भाषा के गुलाम नहीं
लेकिन अपनी भाषा में 
सब कुछ कहना भी आसान नहीं
अपनी भाषा में गाओ -गुनगुनाओ
मगर दूसरी ज़बान को भी
समझो - सराहो
दिल बड़ा हो तो
तमाम अनुभूतियाँ
दामन थाम लेती हैं
क्योकि सारी नदियाँ
समंदर में विराम लेती है

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।