Friday, May 20, 2011

ज़िद


जिंदगी तुझसे माँगी है
 सर छुपाने को छत
खड़े रहने को जमीं
और साँस लेने भर हवा
खुशी से दे तो अहसान
वरना मेरी तो जरूरत है
ले लूँगा किसी भी तरह
बिना कोई दिए कीमत

3 comments:

  1. बहुत सही। प्रेरक।

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  2. बढ़िया प्रस्तुति

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।