Monday, May 24, 2010

कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ














जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ
झूठे वादे करूँ कब तक
कब तक प्यार की कसमें खाऊँ
रस्में दकियानूसी निभाऊँ कब तक
कब तक झूठी बात करूँ
जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ
जानता हूँ तू नहीं महबूबा मेरी
छोड़ कर साथ एक दिन जाएगी
तो फिर आज ही क्यों न कहूँ
लिव मी अलोन, क्यों बोझ सहूँ
जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ
क्यों भला तुझको हँसा कर मैं दर्दों गम उठाऊँ
रूठ जाए तो तुझे मनाऊँ
क्यों नाज़ो-नखरे उठाऊँ
जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ
देख दूर से वो सौत तेरी
मुझे करीब बुला रही है
ढूँढ ले अब तू भी साथी
अलविदा मैं तो चलूँ
जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ

1 comment:

  1. waah zindagi maut ka rishta aur zindgi ka jhoothapan sab kuch hai aapki kavita me badhayi...

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।