Monday, April 13, 2015

तासीर

एक बूँद गिरती है
छन्न-से
गर्म तवे पर
भाप बन जाती है
वही गिरती है
तप्त जमीं पर
अंदर रिसती चली जाती है
गिरती है फूलों पर
शबनम बन जाती है
...........
एक ही
घटना
किसी को
गुस्सा
किसी को
नेह
किसी को
प्यार
सिखाती है
.......
जो जिस
धातु से बना है
जिंदगी
उसे वैसा ही चमकाती है

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।