Tuesday, January 27, 2015

कल रात बारिश हुई थी

कल रात बारिश हुई थी और तुम सोती रहीं
तुमने जगाया ही नहीं मैं नींद में रोती रही
पूरी शब जागने को पहले कब मुझे गुरेज़ था
थकी-सी रहती हूँ इन दिनों नींद भर सोती रही
सोने-से चेहरे पे जब चाँदनी काबिज़ हुई
दिन भर की गर्द को दूध से धोती रही
बादलों की ओट में था चाँद सरे शाम से
बिजलियों से अठखेलियां रात भर होती रही
कोई उसके दर्द को जान न ले मुकम्मल
किताब को चेहरे पे रख कर वो मुस्लस्सल रोती रही
सबके होठों पे खिलें फूल खुशियों के सदा
इस दुआ के बीज वो ख़्वाब में सींचती -बोती रही

2 comments:

  1. barish aayi
    bheege ham aur tum
    us barish main
    bachpan mein hamane
    kagaj ki naav bana tirai


    thanks for this post

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।