Tuesday, January 27, 2015

सांवली दुनिया ही क्यों जादू जगाती है

कुछ तो होता है
कुहासे में
जो हर शै खूबसूरत नज़र आती है
धुन्धलाया-सा होता है हर मंज़र
एक अज़ीब-सी हूक उठती जाती है
जैसे पिछले जनम की याद आती है
बस इतनी -ऐसी -ही हो दुनिया
हसरत ये पर फैलाती है
नज़रों में भर लेने को ये नज़ारा
कशिश बार बार आती है
................................

रंगो से भरी है ये दुनिया
जाने फिर सांवली दुनिया ही क्यों जादू जगाती है

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।