Wednesday, April 20, 2011

केसरिया है प्रेम म्हारो

एक फूल में
उगते हैं
दो फूल केसर
एक कहलाता है केसर
खुशबू, स्वाद, सौंदर्यवर्धक
दूसरा
कहलाता है घास
भाई लोग इसे
केसरिया रंग और खुशबू में
रंग, बना देते हैं केसर
असली-सा
कसौटी पर गर न चढ़े
तो कोई जान नहीं पाता असलियत
बिकता है ज्यादा नकली, असली से
मगर जब होती है पहचान
तब असल पाता है
अपनी जगह और मान
...............
प्यार जो मैंने किया है तुम्हें
काश! कभी कसौटी पर चढ़े
तब हो पहचान

1 comment:

  1. दिल के सुंदर एहसास
    हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।