Tuesday, April 19, 2011

सोनमर्ग

आए ढेरों मिसरे
लिख न पाया
एक भी
नज़म
एक भी गज़ल
बस उठा लिए कुछ बीज
जिन्हें
बनाने की कोशिश करूँगा
चिनार, सफेदा, देवदार, चीड़
या जो भी कुछ...

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।