Friday, March 18, 2011

अनोखी है विषयों की कायनात

बड़ी अनोखी है विषयों की कायनात
इस ब्रह्मांड में सब
एक के, एक सबके
चक्कर लगाते हैं
राजनीति घूमती है अर्थ के गिर्द
अर्थशास्त्र राजनीति के
दोनों समाजशास्त्र के
और समाजशास्त्र दोनों के
ये सब इतिहास के
इतिहास, भूगोल के
भूगोल, भौतिकी के
भौतिकी घुमाती है
रसायन और जीव विज्ञान को
दोनों गणित के
और गणित
गणित संगीत के
संगीत
नृत्य के
नृत्य साहित्य को घुमाता है अपने चारों ओर
साहित्य सौंदर्यशास्त्र और मनोविज्ञान के
और ये दोनों(!)
दर्शन घुमाता है, इन्हें अपने चारों ओर
अरे यह भँवरों का भँवर
मैं फँस गया हूँ इसमें
बड़ी निराली
दुनिया है विषयों की
यहाँ सब घूमते हैं
एक-दूसरे के गिर्द
जैसे ढेर सारे घूमते लट्टू
परिक्रमा करते, करवाते हैं
दूसरे लट्टूओं की
एक-दूसरे से

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।