Thursday, March 3, 2011

बर्फ का सर्द सच

सफेद, खूबसूरत
गंधहीन
रूई-सी
फाहेदार
बर्फ
थोड़ी देर बाद हो जाती है
दलदली
फिसलते हैं
गलते-जमते हैं
जूतों के अंदर
पैर और खून नसों में,
बर्फीला कीचड़ और ठंडा पानी
मिलकर
रचते हैं
सड़कों पर
सर्द बुखार
जिसका असर
रीढ़ से होकर कभी-कभी
मन तक जाता है...

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।