Thursday, April 15, 2010

एक बात कहूँ


एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें
कैसे मुझ बिन दिन काटे तनहा
कैसे बीती मुझ बिन शामें
देर सुबह तक सोई अधजागी-सी
कैसे जाग कर तुमने काटी अपनी रातें
एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें
कैसे कलियों के संग मुस्काईं
कैसे फ़ूलों संग मुरझाईं
कभी उजालों से संग सोई
कभी अँधेरों के संग की बातें
एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें
कैसे जाड़ों में आ गया पसीना
जब याद किया मेरा चुंबन
घनी छाँव सी शीतलता पाईं
कैसे मेरी याद तले आके
एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें
सावन कैसे बरसा रिमझिम
कैसे नयनों से आँसू बरसे
कैसे घनघोर घटा छाई
कैसे आईं मुझ बिन बरसातें
एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें
हम भी एक बात कहें
यदि कह डाली हो तुमने अपनी बातें
काटा है दौरे जुदाई रो-रोकर
नहीं रहे हम भी हँसते-मुस्कुराते
एक बात कहूँ कह-कह कर
कह डाली तुमने सारी बातें

1 comment:

  1. waah sir waah...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।