Sunday, April 11, 2010

मधुमौसम में जाने वाले


विदा प्रिय ! हो शुभ चिरप्रवास

फूल रहे टेसू यहाँ
अमराई बौरा रही
चटख रहा कचनार भी
दहक रहा पलाश
ऐसे मधुमौसम में जाने वाले
विदा   प्रिय! हो शुभ चिरप्रवास
स्वर गुंजित रहेगा तेरा
गूँजेगी तेरे पंखों की परवाज
अपने ध्येय को जाने वाले
विदा प्रिय ! हो शुभ चिरप्रवास
तेरी आहट, तेरी साँसे
 और मधु-स्वर तेरा
साथ गुजारे लम्हों की
छोड़े जाना याद
ओ यादों को छोड़े जाने वाले
विदा प्रिय ! हो शुभ चिरप्रवास

3 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति
    bahut khub

    http://kavyawani.blogspot.com/

    shekhar kumawat

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति
    bahut khub

    http://kavyawani.blogspot.com/

    shekhar kumawat

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  3. कई रंगों को समेटे एक खूबसूरत भाव दर्शाती बढ़िया कविता...बधाई

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।