Tuesday, March 9, 2010

अब भी तू ही


बात है ये तेरे ही होंठो की

सुख के दिन हो, दुख की रातें
खत्म ना होगी, प्यार की बातें
तूफां आएँ चाहे कितने जीवन में
रहेगी नैया एक ही प्रियतम अपनी
बात है ये तेरे ही होंठो की

भूलेंगे नहीं कभी कहा था, तूने
आँखों में भर प्यार जहाँ का
इन आँखों में तो अब भी तू ही,
बदली तेरी परिभाषा ही जीवन की
बात है ये तेरे ही होंठो की

तेरे शब्दों को तो मैंने हरदम
पूजा का-सा मान दिया
गिला है तुझसे बस इतना ही
तूने प्यार को समझा कायरता मेरी

बात है ये तेरे ही होंठो की
जो आज मुझको आज रूलाती है
काश कि पहले जाना होता
तू नहीं वो थी छवि तेरी
बात है ये तेरे ही होंठो की

2 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. सुख के दिन हो, दुख की रातें
    खत्म ना होगी, प्यार की बातें
    तूफां आएँ चाहे कितने जीवन में
    रहेगी नैया एक ही प्रियतम अपनी
    बात है ये तेरे ही होंठो की


    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।