Saturday, March 6, 2010

जीत ले सारा चमन

बना पहचान अपनी जीत ले सारा चमन
रोना-धोना छोड़ रे आज तेरा है गुलशन
तू जिसको कहता नियति
नहीं है वह स्वीकार मुझे
होगी लड़ाई लड़ना अस्तित्व की
छोड़ करना सबको सादर नमन

बना पहचान अपनी जीत ले सारा चमन
रोना-धोना छोड़ रे आज तेरा है गुलशन
तोड़ना होगा तुझको बहुत कुछ
नज़ाकत अपनी न देख
हाथ जो तुझको लगाए
छेद दे उसका बदन

बना पहचान अपनी जीत ले सारा चमन
रोना-धोना छोड़ रे आज तेरा है गुलशन
किस सोच में है तू डूबा
लग रहा अजीब ये सब तुझे
धर्म के लिए तू लड़ रहा
स्वार्थ है तेरा अति पावन

बना पहचान अपनी जीत ले सारा चमन
रोना-धोना छोड़ रे आज तेरा है गुलशन

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।