Wednesday, January 13, 2010

जिंदादिल मैं रहा सदा


जिंदादिल मैं रहा सदा

दुख था मुझ पर भी छाया
ग़म था मैंने भी पाया
लेकिन अपने मुख पर
रहा खुशी का नूर सदा
यश का गायन भी गाया
ग़ुमनामी को भी पाया
हालातों से किया मुकाबला
तनिक पीछे मैं न हटा
बनाया था जिसको हमराज
उसने ही खोला था राज
बिरले थे हम, हमको भी
भायी उसकी यही अदा
तुम गिला क्यों करते हो
क्यों करते हो शिकवा
अपने जीने का तो नीरव
है अंदाज शुरू से अलहदा
जिंदादिल मैं रहा सदा

1 comment:

  1. बेहतरीन...जिन्दगी जिन्दादिलि का नाम है!!

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।