Wednesday, December 23, 2009

सजग मछेरा


हर पल जैसे ,
आकर्षित करता है
समुद्र...
चौबीसों घंटे
कोई-न-कोई
तट पर बैठा,
दौड़ता, टहलता
ध्यानस्थ, योगस्थ
दिख ही जाता है

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।