Sunday, December 20, 2009

वर्किंग गर्ल




एक लड़की
निकलती है अपने ऑफिस से
प्रत्यंचा से छूटे तीर की तरह
(रास्ते में खरीदते हुए फल जो उसे बेहद पसंद है)
सोचती है
कहीं देर न हो जाए
और
सुननी न पड़े
शिकायत
देखती है न इधर, न उधर
रूकती नहीं चौराहों पर
लाल सिग्नल के
हरे होने से पहले ही
पीली रोशनी में
पड़ती है निकल
डाँटती, झुँझलाती
राह काटते
राहगीरों, वाहन चालकों पर
तेज फर्राटे से चलाती
हुई गाड़ी
दू....र
से नजर आता है,
राह में
उसे लेने
पैदल निकला कोई
भर जाती है
खुशनुमा अहसास से
आ जाती है पास
ताकि दूसरे दिन
फिर
बूमरेंग-सी
निकल सके
घर से....

No comments:

Post a Comment

मेरा काव्य संग्रह

मेरा काव्य संग्रह

Blog Archive

There was an error in this gadget
Text selection Lock by Hindi Blog Tips

about me

My photo
मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।