Sunday, May 25, 2014

बची है संभावना




नर्सरी से पौधे खरीदते
दंपत्ति
आश्वस्त करते हैं मुझे
हरियाली बची रहेगी अभी

लाल गुलाब
खरीदकर कोट में छिपाता
लड़का
सांत्वना देता है
प्रेम बचा हुआ है अभी

लायब्रेरी से निकलती
संजीदा नवयुवती
देती है दिलासा
पुस्तकें अब भी पढ़ी जाती हैं

सलीके से साड़ी पहने हुए
स्त्री
मानो भरोसा देती है
गरिमा हमारी अक्षुण्ण है अभी

लाख उलाहना देते हों
लोग
मुझे अब भी नजर आती है
दुनिया में संभावना

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।