Saturday, March 12, 2011

सच और सपना...

मैदानों में बैठकर
गर याद करो
गिरती बर्फ को
तो लगता है
एक सपने-सा
............
अविश्वसनीय हो जाता है
भोगा हुआ सच भी
कभी-कभी
घोर संकट में
नास्तिक के राम-नाम जपने-सा

7 comments:

  1. कुछ शब्दों में बहुत भावपूर्ण और सशक्त प्रस्तुति..

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (14-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. बहुत भावपूर्ण और सशक्त प्रस्तुति|धन्यवाद|

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  4. अच्छी रचना ,बधाई

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  5. विस्तृत पटल की लघु रचना

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  6. संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता...

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।