Saturday, September 4, 2010

संस्कार

वे अपना कोट
नहीं उतारेंगे
भले गर्मी बढ़ गई हो-
क्योंकि
पुरानी और बेरंग कमीज़
का प्रदर्शन करे,
इतना साहस किसी का
नहीं होता।

3 comments:

  1. राजेश जी, सही तमाचा है...........

    इतना साहस किसी में नहीं है.

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  2. bahut khoob.........
    badhai bhi aur muktkanth se prashansaa bhi.....

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।