Saturday, July 17, 2010

महातत्व है पैसा।


आश्चर्य!
अंत में हर चीज
बदल जाती है
पैसे में....।
नाते, रिश्ते, दोस्ती
प्यार और महत्वाकांक्षा
सबका
सबब एक ही
बचता है
पैसा।
पद, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा
प्रशंसा और पराक्रम
अंत में
चाहते हैं
पैसा।
व्यवसायी, अधिकारी
नेता, अभिनेता, कलाकार
और कवि
सब हो पाते हैं
रूपांतरित...
पैसा, पैसा, पैसा।
भौतिकी या खगोलिकी।
विज्ञान है, कला है
या कि कुछ और
कि हर विषय बदल जाता है
वाणिज्य में,
पैसे में...।
हवाएँ, बर्फ, पहाड़
नदियाँ और पेड़
सब पूँजीभूत, संघनित
संगठित हो जाते हैं
पैसे में...।
पंचतत्व सब हो जाते हैं
विलीन
इस एक तत्व में....
ऐसा महातत्व है पैसा।

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।