Sunday, June 13, 2010

वह अनजानी जगह

दूर बॉटल बुरूस
शीशम, अमलतास और गुलमोहर
निगाहें लौट आती हैं
इनकी खुशबू
और आकर्षण से
सराबोर होकर
मैं
यहाँ दूर बैठा हूँ
क्या सचमुच
हाँ भी, नहीं भी
तो फिर?
अनजानी
अनपहचानी
धुँधलाई-सी एक
गुफा-सी में
अरे! यह तो मन है किसी का
किसका?
खोज रहा हूँ, उसी को
अथक, अनवरत ........

4 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति ...


    मंगलवार 15- 06- 2010 को आपकी रचना (गम में लिखे मैंने गीत )... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है


    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. बहुत सुन्दर!

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  3. kya kahoo dil ke jajbaat
    jo na kah saka
    muh mein hi
    simat kar rah gai
    dil ki baat
    un maun darkhaton ki
    manind ankahi si
    anchhui ek lambi
    vedana ki dastaan

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।