Sunday, February 14, 2010

कई रातों को ऐसा भी होता है



कई रातों को ऐसा भी होता है
कि नींद नहीं आती,
बिल्कुल नहीं
आती है तो बस
याद आती है
तेरी याद।
कई रातों को ऐसा भी होता है
तब बेचैन सा में,
बिस्तर पर बदला करता हूँ
करवटें
और हर करवट़
छोड़ जाती है
मन की चादर पर
तेरी यादों की
नई सिलवट।
कई रातों को ऐसा भी होता है
कभी तकिए को
लेटा हूँ
बाँहों में,
कभी बाँहों को,
बनाता हूँ तकिया,
कभी चौंक कर
जलाता हूँ बिजली
कभी अँधेरों को
मीत बनाता हूँ
करता हूँ
गुफ्तगू
लेकिन नींद तब भी नहीं आती,
आती है तो बस
याद आती है
तेरी याद
कई रातों को ऐसा भी होता है
और तब तेरी यादों के
ताने-बाने बुनता है
मन
और उधेड़ता फिर से
उनको
इसी उधेड़बुन में
अचानक
ना जाने कब
आँखें बुनने लगती हैं, ख्वाब
तेरे ख्वाब
कई रातों को ऐसा भी होता है।


1 comment:

  1. सही कहा..कई रातों में ऐसा भी होता है.

    बढ़िया है.

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।