Thursday, February 11, 2010

कब तक धीरज रखूँ

कब तक धीरज रखूँ कब तक आस बँधाऊ मन को मन से
युगों-युगों से प्रतीक्षारत था
बैठा मौन अटल किंतु विकल
ना तुम आते हो, ना आता है तुम्हारा कोई संदेश पवन से
कब तक धीरज रखूँ कब तक आस बँधाऊ मन को मन से
घोर वन अँधेरी राहें
मौन हृदय बेचैन निगाहें
ना तुम बतलाते हो
ना कोई बतलाता है राह गगन से
कब तक धीरज रखूँ कब तक आस बँधाऊ मन को मन से
लय मेरी टूटी जाती है
छंद विस्मृत हो रहे
ना तुम गाते हो
ना गाता है कोई गीत मिलन के
कब तक धीरज रखूँ कब तक आस बँधाऊ मन को मन से
बने निर्दयी इतने तुम कैसे
क्या याद तुम्हें ना आई होगी
जो सचमुच तुम भूले नीरव शाप लगेंगे तुम्हें विरहन के
कब तक धीरज रखूँ कब तक आस बँधाऊ मन को मन से

2 comments:

मेरा काव्य संग्रह

मेरा काव्य संग्रह

Blog Archive

There was an error in this gadget
Text selection Lock by Hindi Blog Tips

about me

My photo
मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।