Tuesday, February 2, 2010

पुराने पापी


कौन कहता है
नहीं पी हमने शराब
आँखों से, साकी से, पैमानों से
हम तो वो है
जो गए निकाले
हमेशा मार कर धक्के मैखानों से
पहले साकी ने
पिलाई हमको
नाज से, अदा से, अंदाजों से
पहचाना जब उसने हमको
दूर किया नजरों से, प्यालों से, मयखानों से
कौन कहता है...
ऐ मेरे दोस्त
बता दे मरे दिल का हाल
मेरे साकी को
अहसान तेरा ताउम्र मानूँगा
कहते फिरे हम ये बात
गली-गली अपनों से बेगानों से
कौन कहता है...
तुम तो खुशकिस्मत हो
जो जल जाते हो
अपनी ही शमा के दामन में
हम तो चाह कर भी जल नहीं पाते
रो-रो के
ये कहते फिरे हम
उन आशिक परवानों से
कौन कहता है..
कौन आया है और कौन है गया
अब तो आहट भी सुनाई नहीं देती
खुद में खोए हैं इतना
पूछते हैं हाल खुद का
आईनों से, अक्स से, दीवारों से
कौन कहता है...

कोई पूछे मेरा हाल

तो इतना ही कहना नीरव

अब तो वो रहते हैं

खुद ही से अनजानों से

कौन कहता है...

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।