Wednesday, January 20, 2010

कर्मं कुरु

अभी मूल्यांकन का वक्त नहीं है

बची अभी है रात अँधेरी
शेष अभी बातें बहुतेरी
अंधकार है कितना छाया सुबह अभी अलमस्त नहीं है
अभी मूल्यांकन...
बहुत अभी संघर्ष बचा है
शेष समर है अभी सारथी
ना लौटा रथ रणभूमि से अभी हौसला पस्त नहीं है
अभी मूल्यांकन ...
साथ बैठकर बाँट ले सुख-दुख
कर लें बातें न फेर अभी मुख
अबके बिछुड़े कब मिले ना कह अभी वक्त नहीं है
अभी मूल्यांकन...
जीवन कर्मों का ही फल है
भाग्य भरोसे आशा निष्फल है
कर सकता बहुत कुछ अभी इतना तो तू व्यस्त नहीं है
अभी मूल्यांकन...
कर ले जितना तू कर सकता
पा ले जितना तू पा सकता
यह कह ना बैठ ओ नीरव इच्छाओं का अंत नहीं है
अभी मूल्यांकन...



1 comment:

  1. WAAH !!!! WAAH !!!! WAAH !!!!

    ATISUNDAR RACHNA......BHAAV SHABD AUR PRAAVHMAYTA NE APNE HI SANG BAHA LIYA....MUGDHKARI ATISUNDAR RACHNA...

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।