Thursday, December 31, 2009

वियोगी होगा पहला कवि...अन्तिम नहीं !


इस बार तुम्हारी दूरी
   कविता नहीं करवाती है
मुझमें अजब-सा सूनापन
अवसाद, शून्यता और बेचैनी भरती जाती है
इस बार तुम्हारी दूरी
मुझसे रचना नहीं करवाती है
कर अवश मुझे
दुखी, वियोगी पात्र
जो मैं हूँ' -- बनाती है
इस बार तुम्हारी दूरी
काव्योचित गरिमा नहीं भर पाती है
प्रेम कहानी के देवदास-नुमा संस्करण को
मेरे बरअक़्स लाती है
इस बार तुम्हारी दूरी
मुझे कवि नहीं बनाती है
जो दूर है अपनी प्रिया से-छटपटाता, धैर्यहीन
ऐसा ऐतिहासिक पात्र बनाती है


1 comment:

  1. सुंदर रचना .. आपके और आपके पूरे परिवार के लिए नया वर्ष मंगलमय हो !!

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।