Thursday, June 23, 2011

अबके सावन


जैसे किसान
एक लहलहाती फसल
काटने के बाद
आग लगा देता है
सारे खेत को
नष्ट हो सके
अनावश्यक ठूँठ
औऱ मिल सके
राख, खाद
मिल सके
नए बीज को
उर्वर जमीन
मेरी भूमि
परती नहीं
प्रतीक्षित है

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।