Thursday, June 24, 2010

अवशता


एक दिन
एक निश्चित दिन
तुमसे न मिल पाने की
अवशता के पूर्व ही मुझे आज लगा
जैसे
तुम दू...र कहीं चली गई हो......

2 comments:

  1. अरे...क्या बात कहदी ना कहते-कहते भी......

    बहुत खूब...

    कुंवर जी,

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मेरा काव्य संग्रह

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मुझे फूलों से प्यार है, तितलियों, रंगों, हरियाली और इन शॉर्ट उस सब से प्यार है जिसे हम प्रकृति कहते हैं।